जो नहीं टूटता, वही पूज्य बनता है , तिल-तिल कटकर भी जो अडिग रहे, वही महान बना.
एक बार की बात है।
हम गंगा जी के किनारे बैठे थे।
गंगा की तरंगों को निहारते हुए, मंत्र जप करते हुए मन शांत था।
वह समय युवा अवस्था का था लगभग बाईस या चौबीस वर्ष।
उसी समय एक व्यक्ति हमारे पास आकर खड़ा हुआ।
उसकी देह से ही स्पष्ट हो गया कि उसने शराब पी रखी है।
एक अप्रत्याशित मुलाकात
हमने उसे प्रणाम किया।
वह चौंक गया।
वह बोला
“बाबा जी, मैं आपको कहाँ ले जाऊँ?”
हमने कहा
“क्या फर्क पड़ता है, जहाँ मन करे ले चलो।”
वह ले गया… वैष्णव धाम।
नशे में भी छुपा हुआ सत्य
नशे की अवस्था में भी वह व्यक्ति भगवान की मूर्ति को देख रहा था
और अजीब-सी गहराई से बोल रहा था—
“देख रहा है इन्हें?
तू कौन है?
भगवान किसके बने?”
हमने कहा
“ये तो भगवान हैं।”
वह बोला
“नहीं… असली बात बता।”
संगमरमर की गूढ़ शिक्षा
उसने पूछा “ये क्या है?”
हमने कहा “संगमरमर।”
वह मुस्कराया और बोला
“समझ ले बाबा…
यही संगमरमर कहीं पैरों के नीचे रौंदा जाता है,
और यही यहाँ भगवान बनकर पूजा जाता है।”
फिर उसने जो कहा, वह जीवन की सबसे बड़ी सीख थी
“ये तिल-तिल काटा गया,
कठोर चोटें झेलीं,
लेकिन टूटा नहीं।
इसलिए आज भगवान बनकर पूज रहा है।”
जीवन का सबसे बड़ा सत्य
उसकी बात सुनकर मन ठहर गया।
जीवन भी बिल्कुल ऐसा ही है।
जो व्यक्ति:
- कठिनाइयों में टूटता नहीं
- अपमान में बिखरता नहीं
- संघर्ष में भागता नहीं
वही एक दिन पूज्य बनता है।
प्रेरणा क्या है?
हर चोट हमें तोड़ने नहीं,
हमें तराशने आती है।
हर संघर्ष हमें गिराने नहीं,
हमें ऊँचा उठाने आता है।
संगमरमर भगवान इसलिए नहीं बना
कि वह सुंदर था,
बल्कि इसलिए बना
कि उसने टूटने से इंकार कर दिया।
निष्कर्ष
यदि जीवन में आज दबाव है,
दर्द है,
संघर्ष है
तो घबराइए मत।
याद रखिए
जो टूटता नहीं,
वही एक दिन उदाहरण बनता है।





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