राम स्तुति | अर्थ सहित हिंदी में | भगवान राम की अद्भुत स्तुति

राम स्तुति | अर्थ सहित हिंदी में | भगवान राम की अद्भुत स्तुति

राम स्तुति | अर्थ सहित हिंदी में | भगवान राम की अद्भुत स्तुति

इस ब्लॉग में पढ़िए राम स्तुति का अर्थ सहित सरल और भावनात्मक वर्णन। जानिए कैसे श्रीराम की स्तुति मन के भय को दूर कर शांति, भक्ति और शक्ति प्रदान करती है।

भारतीय संस्कृति में प्रार्थना केवल शब्द न होकर आस्था और ऊर्जा का रूप होती है।
ऐसी ही एक दिव्य प्रार्थना है “राम स्तुति”
तुलसीदास द्वारा रचित यह स्तुति केवल भगवान राम की सुंदरता, वीरता और करुणा का वर्णन ही नहीं करती, बल्कि मन को भी पवित्र और शांत बनाती है।

“श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन…” मन में भक्ति जगाने वाली पंक्ति

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन
हरण भवभय दारुणम्।
नवकंज-लोचन कंज-मुख,
कर कंज पद कंजरुणम्॥

अर्थ:

हे मन! श्रीराम का भजन करो जो संसार के भय का नाश करते हैं।
उनकी आँखें, मुख, हाथ और चरण कमल के समान सुंदर एवं कोमल हैं।

भावार्थ:
जब मन डर, तनाव या उलझन में होराम का स्मरण तुरंत शांति देता है।

“कंदर्प अगणित अमित छवि…” श्रीराम की अनुपम सुंदरता

कंदर्प अगणित अमित छवि
नवनील-निरद सुन्दरम्।
पटपीत मानहु तडित-रुचि
शुचि नौमि जनक-सुतावरम्॥

अर्थ:

राम की अनंत सुंदरता करोड़ों कामदेव को भी मात देती है।
उनका नीला शरीर मेघ के समान और पीत वस्त्र बिजली जैसे चमकते हैं।
मैं श्री सीतापति राम को प्रणाम करता हूँ।

भावार्थ:
यह पंक्ति हमें दिव्यता और सकारात्मकता का अनुभव कराती है।

“भजु दीनबंधु दिनेश…” राम की करुणा और शक्ति

भजु दीनबन्धु दिनेश
दानव दैत्य वंश निकन्दनम्।
रघुनन्द आनन्दकन्द
कोशलचन्द दशरथनन्दनम्॥

अर्थ:

राम दीन-दुखियों के मित्र, दैत्य-वधकर्ता और रघुवंश के आनंद हैं।
वे अयोध्या के चंद्रमा और दशरथ के पुत्र हैं।

भावार्थ:
राम न्याय, धर्म, शक्ति और करुणा के प्रतीक हैं।

“सिर मुकुट कुंडल तिलकचारु…” दिव्य स्वरूप का वर्णन

सिर मुकुट कुंडल तिलकचारु
उदारु अंग विभूषणम्।
अज अनघ अनन्त दया
सगर-चरन-रज-निधि पूषणम्॥

अर्थ:

उनके सिर पर मुकुट है, कानों में कुंडल, सुंदर तिलक है और दिव्य आभूषण हैं।
वे अजन्मा, पापरहित और अनंत दया के सागर हैं।

भावार्थ:
यह पंक्ति बताती है कि राम केवल राजा नहीं, बल्कि दिव्यता के स्रोत हैं।

“इति वदति तुलसीदास…” भक्ति का समर्पण

इति वदति तुलसीदास
शंकर-शेष-मुनि-मन-रंजनम्।
मम हृदयकंज निवास
कुरु कामादि खलदल-गंजनम्॥

अर्थ:

तुलसीदास कहते हैं
हे राम! आप शिव, शेष और सभी मुनियों के मन को आनंदित करते हैं।
मेरे हृदय रूपी कमल में निवास करें और भीतर के दुष्ट विचारों का नाश करें।

भावार्थ:
यह पंक्ति पूर्ण समर्पण और शुद्धि की भावना व्यक्त करती है।

निष्कर्ष

राम स्तुति अर्थ सहित पढ़ने से न केवल भक्ति बढ़ती है, बल्कि
मन से भय, क्रोध और नकारात्मकता मिट जाती है।
तुलसीदास की इन पंक्तियों में भक्ति, प्रेम और जीवन का सार समाया हुआ है।

यदि आप नियमित रूप से राम स्तुति पढ़ें, तो जीवन में शांति, ऊर्जा और आत्मविश्वास का अनुभव होगा।

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