पौषी पूर्णिमा व्रत कथा और इसका महत्व

पौषी पूर्णिमा व्रत कथा और इसका महत्व

पौषी पूर्णिमा व्रत कथा और इसका महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार पौष मास की पूर्णिमा को पौषी पूर्णिमा या पौषी पूनम कहा जाता है। यह दिन स्नान, दान, व्रत और भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस दिन किया गया दान और जप कई गुना फल प्रदान करता है।

पौषी पूर्णिमा की पौराणिक कथा

प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक निर्धन ब्राह्मण परिवार रहता था। परिवार बहुत धार्मिक था, लेकिन गरीबी के कारण उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ब्राह्मण की पत्नी अत्यंत श्रद्धालु और धैर्यवान थी।

एक वर्ष पौष मास की पूर्णिमा आई। उस दिन ठंड बहुत अधिक थी, फिर भी ब्राह्मणी ने संकल्प लिया कि वह पौषी पूर्णिमा का व्रत अवश्य करेगी। उसने प्रातःकाल नदी में स्नान किया, भगवान विष्णु का ध्यान किया और व्रत का संकल्प लिया।

श्रद्धा और दान का फल

व्रत के दिन ब्राह्मणी के घर कुछ भी खाने को नहीं था, फिर भी उसने जो थोड़ा-सा अन्न था, वह एक भूखे साधु को दान कर दिया। स्वयं उसने केवल जल ग्रहण किया और पूरे दिन भगवान विष्णु का स्मरण करती रही।

रात्रि में पूर्णिमा के चंद्रमा के दर्शन कर उसने भगवान से केवल यही प्रार्थना की

“हे प्रभु, हमें धन नहीं चाहिए,
बस हमारे जीवन में धर्म और शांति बनी रहे।”

भगवान की कृपा

कथा के अनुसार, भगवान विष्णु उस स्त्री की श्रद्धा और त्याग से प्रसन्न हुए। कुछ ही समय में उसके परिवार की सभी कठिनाइयाँ दूर होने लगीं। घर में अन्न-धन की कमी समाप्त हो गई और परिवार सुख-शांति से रहने लगा।

कहा जाता है कि उस जन्म के बाद उस ब्राह्मणी को वैकुंठ धाम की प्राप्ति हुई।

पौषी पूर्णिमा व्रत से मिलने वाला पुण्य

शास्त्रों के अनुसार पौषी पूर्णिमा पर:

  • प्रातः स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं
  • दान करने से अक्षय पुण्य मिलता है
  • भगवान विष्णु की पूजा से जीवन में शांति आती है
  • पूर्णिमा का व्रत मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है

पौषी पूर्णिमा पर क्या करें?

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें
  • भगवान विष्णु या नारायण का पूजन करें
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या दान दें
  • पूर्णिमा की कथा सुनें या पढ़ें
  • चंद्र दर्शन कर व्रत का पारण करें

निष्कर्ष

पौषी पूर्णिमा केवल एक तिथि नहीं, बल्कि श्रद्धा, दान और संयम का पर्व है। इस दिन सच्चे मन से किया गया छोटा-सा कर्म भी जीवन को सकारात्मक दिशा दे सकता है।

श्रद्धा से किया गया व्रत और दान
जीवन को सुख, शांति और मोक्ष की ओर ले जाता है।

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