मधुराष्टकम् श्रीकृष्ण की माधुर्य लीला पूर्ण अर्थ सहित

मधुराष्टकम् श्रीकृष्ण की माधुर्य लीला पूर्ण अर्थ सहित

मधुराष्टकम् श्रीकृष्ण की माधुर्य लीला पूर्ण अर्थ सहित

मधुराष्टकम् का सरल हिंदी अर्थ जानिए। श्रीकृष्ण के इस मधुर स्तोत्र का महत्व, पाठ करने के लाभ और पढ़ने से मिलने वाले आध्यात्मिक फल विस्तार से पढ़ें। रचनाकार श्री वल्लभाचार्य
यह स्तोत्र श्रीकृष्ण के सर्वांगीण माधुर्य का वर्णन करता है।

मधुराष्टकम् श्लोक का भावार्थ

अधरं मधुरं वदनं मधुरं
नयनं मधुरं हसितं मधुरम्।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ:
श्रीकृष्ण के अधर मधुर हैं, मुख मधुर है। नेत्र मधुर हैं, उनकी मुस्कान मधुर है। हृदय मधुर है, उनकी चाल मधुर है। माधुर्य के स्वामी श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

वचनं मधुरं चरितं मधुरं
वसनं मधुरं वलितं मधुरम्।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥
`

अर्थ:
उनकी वाणी मधुर है, चरित्र मधुर है। वस्त्र मधुर हैं, शरीर की भंगिमा मधुर है। उनकी गति और चेष्टाएँ मधुर हैं। श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

वेणुर्मधुरो रेनुर्मधुरः
पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ:
बांसुरी मधुर है, चरणों की धूल मधुर है। हाथ मधुर हैं, चरण मधुर हैं। उनका नृत्य मधुर है, सख्य भाव मधुर है। श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

गीतं मधुरं पीतं मधुरं
भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम्।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ:
उनका गीत मधुर है, पीना मधुर है। भोजन मधुर है, शयन मधुर है। रूप मधुर है, तिलक मधुर है। श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

करणं मधुरं तरणं मधुरं
हरणं मधुरं रमणं मधुरम्।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ:
उनकी क्रियाएँ मधुर हैं, पार लगाना (उद्धार) मधुर है। हरण (लीलाएँ) मधुर हैं, रमण मधुर है। उगलना और शमन करना भी मधुर है। श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

गुञ्जा मधुरा माला मधुरा
यमुना मधुरा वीची मधुरा।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ:
गुंजा की माला मधुर है। यमुना मधुर है, उसकी लहरें मधुर हैं। जल मधुर है, कमल मधुर है। श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

गोपी मधुरा लीला मधुरा
युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरम्।
दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ:
गोपियाँ मधुर हैं, लीलाएँ मधुर हैं। संग मधुर है, मुक्ति भी मधुर है। दृष्टि मधुर है, शिष्टता मधुर है। श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

गोपा मधुरा गावो मधुरा
यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं
मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्॥

अर्थ:
गोप मधुर हैं, गौएँ मधुर हैं। दण्ड मधुर है, सृष्टि मधुर है। दलन और फलन (कार्य-फल) मधुर हैं। श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर है।

मधुराष्टकम् पढ़ने से मिलने वाले लाभ

  • मन को शांति और स्थिरता मिलती है
  • नकारात्मक विचारों में कमी आती है
  • भक्ति भाव और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है

मधुराष्टकम् केवल एक स्तोत्र नहीं, बल्कि श्रीकृष्ण के प्रेम और माधुर्य का अनुभव कराने वाला दिव्य माध्यम है। इसके नियमित पाठ से जीवन में शांति, भक्ति और आनंद का संचार होता है।

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