गोपाल दास हाथी की चमत्कारी कहानी: संत रसिक मुरारी जी का भक्त हाथी

गोपाल दास हाथी की चमत्कारी कहानी: संत रसिक मुरारी जी का भक्त हाथी

गोपाल दास हाथी की चमत्कारी कहानी: संत रसिक मुरारी जी का भक्त हाथी

धारंदा के महान संत रसिक मुरारी जी के नाम से जुड़ी एक अनोखी और प्रेरणादायक कहानी है। इस कहानी में एक क्रोधित और दुष्ट हाथी गोपाल दास कैसे संत की भक्ति और गुरु की कृपा से बदलकर भक्त बन गया, इसका वर्णन है। यह कहानी भक्ति की शक्ति और गुरु-शिष्य के अनमोल संबंध को दर्शाती है।

बानपुर की जमीन और नवाब की दुष्टता

बानपुर गांव की जमीन संत सेवा के लिए रसिक मुरारी जी के नाम कर दी गई थी। लेकिन उस समय के नवाब का स्वभाव अत्यंत दुष्ट था। उसने उस जमीन को जबरन कब्जे में लेने का आदेश दिया। यह जमीन संतों के रोज के भंडारे के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी।

रसिक मुरारी जी का सामना

जब संत श्यामानंद जी को नवाब की योजना का पता चला, तो उन्होंने अपने गुरु रसिक मुरारी जी को भेजा ताकि वे इस समस्या का समाधान निकाल सकें। रसिक मुरारी जी बिना भय के नवाब के पास गए, लेकिन नवाब ने उनकी परीक्षा लेने के लिए अपने क्रोधित हाथी को सामने भेजा।

हाथी गोपाल दास का चमत्कार

हाथी क्रोध में था और मदिरा के नशे में भी था। लेकिन रसिक मुरारी जी ने शांत चित्त होकर हाथी को “कृष्ण कृष्ण” कहते हुए उसे समझाया कि तुम भगवान के अंश हो, तामसिक स्वभाव छोड़ो। इस भक्ति और प्रेम से प्रभावित होकर हाथी ने घुटने टेक दिए और गुरुजी के चरणों में सिर रख दिया।

गोपाल दास की भक्ति और सेवा

रसिक मुरारी जी ने उस हाथी को तुलसी की माला पहनाकर अपना शिष्य बना लिया और उसका नाम गोपाल दास रखा। अब गोपाल दास संतों की सेवा करता, भारी सामान उठाता और सभी संतों के सामने सम्मानपूर्वक प्रणाम करता था। उसकी भक्ति देखकर नवाब भी प्रभावित हुआ और उसने अपनी हड़पी हुई जमीन वापस कर दी।

दुश्मनों की चाल और गोपाल दास की निष्ठा

नवाब के सैनिक जब गोपाल दास को पकड़ने आए, तो वह अपनी आध्यात्मिक शक्ति से उन्हें भगा देता था। अंत में एक कपटी साधु के बहकावे में आकर गोपाल दास बंदी बना लिया गया। वहां भी उसने केवल भगवत प्रसाद ग्रहण किया और कोई अन्य भोजन या जल नहीं लिया।

परम शांति की प्राप्ति

जब गोपाल दास को गंगा जल पिलाने के लिए गंगा किनारे ले जाया गया, तो उसने गुरुजी का ध्यान करते हुए अपने शरीर का त्याग कर दिया। उसकी आत्मा को परम शांति प्राप्त हुई। यह भक्ति और गुरु की शक्ति का अद्भुत उदाहरण था।

निष्कर्ष

गोपाल दास हाथी की यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति और गुरु की कृपा से हर दिल और मन बदला जा सकता है। चाहे कितनी भी कठोर परिस्थितियाँ क्यों न हों, प्रेम और भक्ति का प्रकाश उन्हें बदल सकता है। संत सेवा और गुरु भक्ति का यह संदेश आज भी हमें प्रेरित करता है।

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