भोलेनाथ की अद्भुत स्तुति | मौलिक शिव भक्ति गीत

भोलेनाथ की अद्भुत स्तुति | मौलिक शिव भक्ति गीत

भोलेनाथ की यह मौलिक शिव स्तुति प्रेम, भक्ति और श्रद्धा से भरपूर है। अर्थ सहित पढ़ें और भगवान शिव की महिमा का अनुभव करें।

भगवान शिव, जो भोलेनाथ, महादेव, शंकर और त्रिपुरारी के नाम से जाने जाते हैं, सृष्टि के संहारक ही नहीं, बल्कि करुणा और प्रेम के सागर भी हैं। भक्त उन्हें भस्म रमाये, गंगाधर, नीलकंठ और कैलाशपति के रूप में स्मरण करते हैं। यहाँ प्रस्तुत है एक मौलिक शिव भक्ति गीत (स्तुति), जिसे आप सुबह-शाम गाकर अपने जीवन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा भर सकते हैं।

मौलिक शिव स्तुति

ॐ त्रिलोचन महादेव, शरण में तेरी आया हूँ,
भस्म रमाये तन पर, नाथ तुझे नमन किया हूँ।

गंगा शीतल शिर पर, चंद्र मुकुट सुहाता है,
डमरू की नाद से, जीवन में सुख आता है।

हे नीलकंठ त्रिपुरारी, संकट हर लेने वाले,
तेरे चरण कमल में, प्रेम सुधा मैं पाले।

कर दो कृपा अपार, हटे तमस अज्ञान का,
तेरे नाम का प्रकाश, भर दे जीवन ज्ञान का।

अर्थ

ॐ त्रिलोचन महादेव – तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की शरण में आया हूँ।

भस्म रमाये तन पर – उनका वेश वैराग्य और पवित्रता का प्रतीक है।

गंगा शीतल शिर पर – उनके जटाओं में गंगा और मस्तक पर चंद्र विराजते हैं।

डमरू की नाद से – डमरू की ध्वनि जीवन में आनंद और शांति लाती है।

हे नीलकंठ त्रिपुरारी – वे विष पीकर भी संसार की रक्षा करते हैं और भक्तों के कष्ट हरते हैं।

कर दो कृपा अपार – वे अज्ञान दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।

शिव की स्तुति केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा है। यह मन में स्थिरता, हृदय में प्रेम और जीवन में संतुलन लाती है। प्रतिदिन इसे गाने या सुनने से मनोबल और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है।

आप भी इस मौलिक स्तुति को अपने परिवार और मित्रों के साथ साझा करें, ताकि भोलेनाथ की कृपा सभी तक पहुँचे।

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